मधुबनी के बड़ी मस्जिद में ठहरे हुए बंगाल के प्रवासी मजदूर
मधुबनी के बड़ी मस्जिद में ठहरे हुए बंगाल के प्रवासी मजदूर
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पटना डेस्क (अखलाख सिद्दीकी): कोरोना संक्रमण के मद्देनजर लागू किए गए लॉकडाउन के बीच जहां अधिकांश ख़बरें सामाजिक सौहाद्रता बिगड़ने की आ रही थी। वहीं मधुबनी जिला ने सामाजिक समरसता का एक नया मिशाल पेश किया है। मामला शहर के बड़ी बाजार इलाके का है जहां स्थित मस्जिद में एक दर्जन के करीब हिंदू मजदूर लॉकडाउन के शुरुआती दिनों से ठहरे हुए हैं। दरअसल, ये सभी मजदूर पश्चिम बंगाल के 24 परगना जिले के रहने वाले हैं और पिछले दिसंबर में भवन निर्माण का कार्य करने मधुबनी आए थे।

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लॉकडाउन में काम बंद होने के बाद से इनका आशियाना भी छीन गया। जिसके बाद स्थानीय लोगों की मदद से मस्जिद में इनके ठहरने का प्रबंध किया गया और समाजसेवी अमानुल्लाह खान ने इनके खाने पीने का भी प्रबंध कराया। लोगों ने इन्हें घर भेजने का भी प्रयास किया लेकिन सफलता नहीं मिली। अब जब तक लॉकडाउन लागू रहेगा, यातायात की व्यवस्था नहीं होगी मस्जिद ही इनका संसार है और स्थानीय लोग ही इनके परिवार हैं।

बंगाल के प्रवासी मजदूर सुब्रता मंडल और गोपाल मंडल बताते हैं कि संकट के इस घड़ी में लोगों की ये मदद और मस्जिद की ये यादें जीवन भर के लिए उनके जेहन में कैद हो गई है। मानवता और मनुष्य की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है। मधुबनी वासियों ने इसे चरितार्थ कर दिया है।

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