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कोरोना संकट काल में लॉकडाउन के कारण बिहार के बाहर फंसे मजदूरों को बिहार वापस लाने को लेकर बिहार में सियासत जमकर हुई. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार लॉकडाउन को लेकर स्वास्थ्य सुरक्षा का हवाला देते हुए बिहार के बाहर फंसे छात्र और मजदूरों को बिहार वापस नहीं लाने की बात पर अड़े रहे. तो विपक्ष राजद सरीखे तमाम दल सीएम ने इस निर्णय पर दवाब बनाने का पूरा प्रयास करती रही.

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इस बीच कई राज्य ऐसे भी थे जो शुरुआती दिनों में ही अपने राज्य के मजदूरों और छात्रों को बसों से अपने राज्य वापस ले आए. जिनमें उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में शामिल हैं.

वहीं अब केंद्र सरकार के तरफ से यह दिशा निर्देश जारी किए गए हैं कि जिन राज्यों के मजदूर और छात्र किसी दूसरे राज्य में फंसे हुए हैं उनको अपने राज्य जाने के लिए आवागमन की अनुमति है. इसके लिए एक राज्य दूसरे राज्य से समन्वय स्थापित कर मजदूरों की घर वापसी करवाएंगे. केंद्र सरकार के इस आदेश के बाद बिहार सरकार ने यह कहते हुए हाथ खड़े कर दिए कि हमारे पास इतनी बसें नहीं है कि हम अन्य राज्यों में लॉकडाउन में फंसे लोगों की वापसी करवा सकें.

जिसके बाद बिहार सरकार की जमकर फजीहत हुई थी. उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी और जदयू के नेता अशोक चौधरी ने इस तरह का बयान दिया था. केंद्र सरकार के तरफ से आवागमन की अनुमति और बिहार सरकार के पास संसाधनों की कमी पर पक्ष विपक्ष की राजनीति के बीच बाहर फंसे छात्र मजदूरों को कहीं ना कहीं फजीहत झेलनी पड़ी.

हालांकि राहत की खबर यह है कि केंद्र के तरफ से मजदूरों को अपने राज्य वापस भेजने के लिए चलाए गए 6 श्रमिक स्पेशल ट्रेन में एक ट्रेन जयपुर से चलकर आज पटना के दानापुर जंक्शन पंहुच रही है.

इस बीच सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री की खिंचाई का कोई मौका लोग नहीं छोड़ रहे हैं. क्योंकि आपदा की इस घड़ी में सीएम सिर्फ अपनी ड्यूटी करते हुए नजर आ रहे है. बांकी सीएम ने कोई ऐसा काम नहीं किया जिससे लोग यह कहें… सीएम हो तो नीतीश जैसा. गांवों के क्वारिंटइन सेंटर का हाल बुरा है. कई सेंटर में इस हालात में भी पर्याप्त संसाधन मुहैया नहीं करवाने के कारण प्रदर्शन बवाल हो रहे हैं.

इधर सोशल मीडिया पर एक फेसबुक पोस्ट सबका ध्यानाकर्षण कर रही है, जिसमें यह कहा जा रहा है कि इस बार बिहार के सीएम नीतीश कुमार से यह 13 सवाल जरूर किये जाने चाहिए. पोस्ट लिखा है दरभंगा जिले के जाले प्रखंड के अनिल झा ने. उन्होंने लिखा है –

जनता इसबार इ महानुभाव से एतना त जरूर पूछेगी कि –

1. पन्द्रह साल में आपने कोई उद्योग नहीं लगाया बिहार में. और जो उद्योग बन्द है ना उसको ही चालू किये. त किये का बथुआ उखाड़े कि सूथनी सोहे ??

2. पन्द्रह साल बाद भी गर्व से TV पर आके कहते हैं कि आप सब तो जानते ही हैं की बिहार पिछड़ा और गरीब राज्य है. डूब मरिये.

3. पन्द्रह साल बाद भी आप बिहार से एक भी छात्र का पलायन नहीं रोक सके जहाँ तक कि बढ़िए गया. त करते का हैं ?

4. पन्द्रह साल बाद भी बिहारी मजदूरों को एगो झोड़ा आ गोर में प्लास्टिक का एगो चप्पल एक जोड़ी कपड़ा लेके बिहार से बाहर देश के सभी कोना में दर दर का ठोकर खाना पड़ता है।

5. पन्द्रह साल बाद भी बिहार से विस्थापित एकौगो परिवार को आप वापस नहीं बुला सके. जो जहां झुग्गी में भी है त सोचता है बिहार से ठीके हैं.

6. पन्द्रह साल बाद भी आपके अस्पताल का भवन भले ही ऊंचा हुआ हो इलाज की सुविधा घटते जा रहा है.

7. पन्द्रह साल बाद भी इस्कूल भले दुमंजिला हो गया मगर पढ़ाई एतना अच्छा कि इस्कूल का मास्टरो अपना बच्चा के प्राइभेटे में पढ़वाता है.

8. पन्द्रह साल बाद भी राज्य का पन्द्रहगो स्टेट बोडिंग आपसे चालू नहीं हुआ.

9. पन्द्रह साल बाद भी राज्य से घूसखोरी घटने का नामे नहीं ले रहा है. सब टाल ठोक के कहता है हमको भी देना पड़ता है. पंचायत के वार्ड से लेकर पटना के कार्यालय तक भ्रष्टाचार पसरा हुआ है.

10. पन्द्रह साल बाद भी बिहार में एकउगो खादी भण्डार आपसे चालू नहीं हुआ. एक जमाना में महिलाओं का इ संस्था बड़का सहारा था

11. पन्द्रह साल में एगो गान्धी शेतु आपसे ठीक नहीं हुआ. मेडिकल आ इंजीनियरिंग कॉलेज का त बाते नहीं कीजिये.

12. अंत मे एतने कहेंगे कि पन्द्रह साल राज किये बिहार में तैयो आपको थोड़बो सरम लेहाज़ है कि नहीं ?  ठिठियाते हैं. आकि बिहारी को बुड़बक समझते हैं ??

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