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भगवान शिव (Lord Shiva) के कई सारे मंदिर हमारे देश मे मौजूद हैं और हर मंदिर से कोई ना कोई विशेष कथा जुड़ी हुई है। आज हम आपको भगवान शिव के एक ऐसे ही विशेष मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं। कहा जाता है कि इस मंदिर में भोलेनाथ ने ब्रह्मा जी को श्राप दिया था। ये मंदिर तमिलनाडु (Tamil Nadu) के तिरुवनमलाई जिले में स्थित है। अन्नामलाई पर्वत की तराई में स्थित इस मंदिर को अनामलार या अरुणाचलेश्वर शिव मंदिर के नाम से जाना जाता है। अरुणाचलेश्वर शिव मंदिर विश्व का सबसे बड़ा शिव मंदिर भी है। इस मंदिर को बेहद ही सुंदर तरीके से बनाया गया है। वहीं सावन महीने के दौरान इस मंदिर में खासा भीड़ देखने को मिलती है। दूर-दूर से भक्त यहां आकर शिव का जलाभिषेक करते हैं। हालांकि इस साल कोरोना के कारण इस मंदिर को बंद रखा गया है।

मंदिर से जुड़ी कथा

शिवपुराणम में इस मंदिर की कथा का जिक्र किया गया है। कहा जाता है कि एक बार विष्णु जी और ब्रह्मा जी के बीच अपनी श्रेष्ठता को लेकर विवाद हो गया था। इस विवाद को हल करने के लिए इन्होंने शिव जी से मदद मांगी। तब शिव जी ने इन दोनों की एक परीक्षा लेने का फैसला किया। शिव जी ने विष्णु जी और ब्रह्मा जी से कहा कि जो सबसे पहले मेरा आदि या अंत खोज लेगा, वही अधिक श्रेष्ठ होगा।

भगवान विष्णु ने वराह अवतार धारण कर भूमि खोदकर शिव का अंत (पांव का अंगूठा) खोजना शुरू कर दिया। जबकि भगवान ब्रह्मा ने हंस का रूप धारण कर उनका आदि स्वरूप (शीर्ष) खोजने के लिए आकाश में उड़ भरी। लेकिन इन दोनों में से किसी को भी सफलता नहीं मिल सकी। जिसके बाद भगवान विष्णु अपनी हार मानते हुए वापस लौट आए।

वहीं दूसरी ओर ब्रह्मा जी भी शिव का शीर्ष ढूंढते हुए थक गए। हालांकि इसी दौरान इन्हें पृथ्वी पर केवड़े का पुष्प गिरा हुआ मिला। केवड़े का ये पुष्य भगवान शिव के बालों से कई युगों पहले यहां गिरा था। जब ब्रह्मा जी को ये बात पता चली तो उन्होंने पुष्प से प्रार्थना की कि वो शिव से झूठ बोले कि ब्रह्मा जी ने उनका आदि अर्थात शीर्ष देख लिया है।

ब्रह्मा जी के कहने पर पुष्य झूठ बोलने के लिए राजी हो गया। वहीं जब ब्रह्मा जी और केवड़े के पुष्य ने झूठ बोला, तो शिव जी को क्रोध आ गया। उन्होंने ब्रह्मा जी को ये श्राप दिया की धरती पर उनका कोई भी मंदिर नहीं होगा। जबकि केवड़े के पुष्य को श्राप देते हुए कहा कि उसका प्रयोग कभी भी उनकी पूजा में नहीं किया जाएगा।

हो जाती है हर कामना पूरी

ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर में आकर परिक्रमा करने से हर मनोकामना को शिव जी पूरा कर देते हैं। इस वजह से श्रद्धालु अन्नामलाई पर्वत की परिक्रमा करते हैं। ये परिक्रमा 14 किलोमीटर लंबी होती है। परिक्रमा करने के बाद श्रद्धालु शिव के दर्शन कर, शिव से मन्नत मांगते हैं।

होता है विशाल मेले का आयोजन

अरुणाचलेश्वर शिव मंदिर में हर साल विशाल मेले का आयोजन भी किया जाता है। ये मेला कार्तिक पूर्णिमा के दिन आयोजित किया जाता है और इस मेले को देखने के लिए श्रद्धालुओं की खासा भीड़ उमड़ती है।



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